शब्द
जितनेभी कम शब्द कहे आपने,
बस शहदकी मिठासही थी,
जिंदगीकी मिठीसी मिठास मेरी यु नं गुम करो,
चाहे कुछभी करो, पर अपनी खामोशिसे मुझे मत मारो,
शब्दोंको आपके मैने सर आंखोंसे लगाया,
नं गिरने दिया जमींपे, झट हथेली पे संभाला,
मेरे आंचल से उन्हे छुडाकर, नं मेरी गोद यु सुनी करो,
चाहे कुछभी करो, पर अपनी खामोशिसे मुझे मत मारो,
शब्दही है आपके मेरा दशेहरा दिवाली,
शब्दही है आपके मेरा कर्म मेरी पूजा,
ईश्वर और भक्त के बीच नं यु दिवार खडी करो,
चाहे कुछभी करो, पर अपनी खामोशिसे मुझे मत मारो!!
- हरीप्रिया