जब तुम्हारा जिक्र हुवा ऐ जिंदगी
सामनेवालेने पुछा "कौन है यह जिंदगी"?
"जानना चाहते हो?" कह्के मैने कहा,
"तुम जो हो वो है जिंदगी,
तुम्हारे सामने जो मै हू खड़ी वो है जिंदगी,
हरएक चेहरेमें नजर आऐ जो वो है जिंदगी,
मासूम मुस्कुराहट में खिलखिले जो वो है जिंदगी,
पत्तोंमे लेहरा रही है वो है जिंदगी,
फुलोंमें महक रही है वो है जिंदगी,
हवासे मुझे छु रही है वो है जिंदगी,
उजाले की पहली किरण है जिंदगी,
फैली हुई बाहोंमे समायी ना समाये वो है जिंदगी,
और नन्ही बाहोंमे पलमे सिमट आऐ एैसी है जिंदगी,
तेरी मेरी अच्छाईयोंमें शामिल है जिंदगी,
कहीभी ना होते हुए भी, हर शय मै मौजूद है जिंदगी,
सांसोसे लेकर हृदयतक पोहंचे वो है जिंदगी,
मै उसकी कुछभी नही पर, मेरा सबकुछ है जिंदगी,
मरना आसान है पर मुश्कील है जिंदगी,
इसीलिए तो मेरी मंजिल है जिंदगी."